झारखंड में भी जनगणना कराने की सहयोगी दल कांग्रेस और राजद की मांग के बावजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा में दुविधा।

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रांची: बिहार में जातीय जनगणना और उसकी रिपोर्ट पर ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण कोटा बढ़ा दिए जाने के बाद अब झारखंड में भी कांग्रेस और राजद ने जातीय जनगणना कराने के लिए सरकार पर दवाब बढ़ाना शुरू कर दिया है. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने कहा कि जिस तरह से बिहार में महागठबंधन की सरकार ने अपने स्तर से जातीय जनगणना (जातीय सर्वे) करा कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की है और उसी आधार पर वहां संख्या के अनुपात में आरक्षण का कोटा बढ़ाकर 60% से 75% तक किया गया है, उसी तर्ज पर राज्य की हेमंत सरकार को पहल करनी चाहिए. वहीं राजद के वरिष्ठ पूर्व उपाध्यक्ष राजेश यादव ने भी राज्य में जातीय गणना कराकर पिछड़ी जातियों को संख्या के अनुपात में हक देने की मांग की है.

अपने स्तर पर जातीय जनगणना कराने को लेकर दुविधा में झामुमोः बिहार सरकार ने जिस तरह करीब 500 करोड़ की राशि खर्च कर जातीय जनगणना करायी है उसी के अनुरूप झारखंड में भी जनगणना कराने की सहयोगी दल कांग्रेस और राजद की मांग के बावजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा अभी इस मुद्दे पर दुविधा में दिख रहा है. केंद्र से जातीय जनगणना की मांग तो झामुमो के नेता करते हैं, लेकिन राज्य सरकार अपने स्तर पर जनगणना कराएं इस पर पार्टी का रूख अभी साफ नहीं है. इस संबंध में जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार पांडेय कहते हैं कि यह एक बड़ा मुद्दा है और इस पर फैसला हमारी केंद्रीय कमेटी या केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ही ले सकते हैं. मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि जब तक उच्च स्तरीय बैठक में फैसला नहीं हो जाता, पार्टी का स्टैंड कैसे साफ किया जा सकता है.

भाजपा के स्टैंड साफ होने का इंतजार कर रहा है झामुमो नेतृत्व- सतेंद्र सिंहः झारखंड की राजनीति पर करीबी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सतेंद्र सिंह कहते हैं कि झामुमो की राज्य में सीधी टक्कर भाजपा से है. यह भी सच्चाई है कि झामुमो को सवर्णों का भी कुछेक प्रतिशत वोट मिलता रहा है. ऐसे में झामुमो इस दुविधा में है कि एक ओर तो वह पिछड़ों-दलितों में अपना पैठ बढ़ाना चाहता है तो दूसरी ओर वह उन वोटरों को भी नाराज नहीं करना चाहता जो उन्हें समर्थन करते रहे हैं. सतेंद्र सिंह के अनुसार झामुमो इस मुद्दे पर केंद्र से तो जातीय जनगणना कराने की मांग करता रहेगा, वहीं राज्य की सरकार अपने खर्च से जातीय गणना कराए इस पर तब तक मौन रहेगा, जबतक भाजपा अपना रुख साफ नहीं कर देती.

जल्द इस मुद्दे पर झामुमो बुला सकता है उच्च स्तरीय बैठकः झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुमार मनोज पांडेय के अनुसार जाति आधारित गणना और उसकी रिपोर्ट के अनुसार आरक्षण की व्यवस्था करना एक अहम मुद्दा है. ऐसे में इस पर पार्टी का रुख साफ करने के लिए जल्द पार्टी की उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है.

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