दुमका संताल परगना 1 जनवरी , खरसावां- गोलीकांड , झारखंड की स्मृति में महान शहीद दिवस मनाया गया।”

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“आज 1 जनवरी , खरसावां- गोलीकांड , झारखंड की स्मृति में महान शहीद दिवस मनाया गया।”

दुमका, संताल परगना : 1 जनवरी 2024 को दुमका के फूलो मुर्मू – झानो मुर्मू चौक में आदिवासी युवाओं ने इकट्ठा होकर 1 जनवरी 1948 को खारसांवा गोलीकांड में शहीद हुए आदिवासीयों को याद किया तथा पुष्प अर्पित किया और इस दिन के घटना को आदिवासीयों का शहादत दिवस के रूप में मनाया । साथ में फूलो मुर्मू झानो मुर्मू की प्रतिमा / स्थान की साफ़ सफ़ाई किया| इन्ही के साथ महान संताल हुल व उलगुलान में शहीद हुए आबुवा दिसोम के लिए वीर विरांगना को याद किया गया, अंत मे बोंगा – बुरु पूर्वजों को प्राथना किया गया की झारखण्ड वासी और भारत देश के लोग सुख शांति में रहें|

खरसावां- गोलीकांड 1 जनवरी 1948 को हुई थी। जालियनवाला बाग गोलीकांड (13 अप्रैल 1919) से कम भयानक और दिल दहलाने वाली नहीं है। उसी प्रकार 6 फरवरी 1949 को गुंडूरिया- गोली कांड, मयूरभंज जिला, उड़ीसा में हुई थी। दोनों गोली कांड में सैंकड़ों मृत और घायल लोग बृहद झारखंड प्रदेश की मांग के लिए मारे गए थे। तब नेता गायब हो गए थे। दोनों गोली कांड की जांच का मामला कभी उठा नहीं। जो आज भी जरूरी है। गोली कांड की सच्चाई सामने आए और भारतीय इतिहास में जालियांवाला बाग की तरह अपना स्थान पा सके। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भी 1855 के संथाल हूल (जो अंग्रेजो के खिलाफ संथाल विद्रोह) को 1857 के सिपाही विद्रोह की जगह प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का स्थान मिलना वाजिब है।

मौके पर मौजूद अमर मरांडी, निखिल मुर्मू , मुकेश टुडू, सच्चिदानंद सोरेन , राजू हांसदा , राम हांसदा , लक्ष्मण हांसदा, चंदू हेंब्रम, अनिल मुर्मू , अंकित सोरेन, जैक मरांडी, निखिल मरांडी , सुभाष किस्कू आदि उपस्थित थे।

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