झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति का वर्तमान राजनीति में भविष्य।

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झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति का वर्तमान राजनीति में भविष्य।

धनबाद : 18 जून धनबाद के बलियापुर में झारखंड खतियान भाषा बचाओ समिति के तत्वाधान में राजनीति में पैर जमाने की नई शुरुआत की गई। झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति आइकॉन टाइगर जयराम महतो इसके प्रमुख चेहरे के रूप में उभर कर आए हैं। धनबाद के बलियापुर में झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा, भीमराव अंबेडकर विनोद बिहारी महतो जैसे नेताओं का माल्यार्पण कर इस सभा की शुरुआत हुई है। हजारों की संख्या में लोग धनबाद बोकारो और हजारीबाग से नई पार्टी के आगाज में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।

 

 

शुरुआत कैसे हुई? 2022 में वर्तमान सत्ताधारी झारखंड में जेएमएम के द्वारा धनबाद बोकारो जैसे जिलों में भोजपुरी और मगही को यहां का क्षेत्रीय भाषा बनाया गया, परंतु यहां के स्थानीय निवासी स्थानीय रूप से बोले जाने वाली भाषा खोरठा कुड़माली को नजरअंदाज किया गया। जिसका पहला विरोध सोशल एक्टिविस्ट मनीष कुमार महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाकर विरोध किया था। लोग सोचा भी नहीं होगा कि यह भाषा आंदोलन किसी एक नए नेता को जन्म देगा। धनबाद, बोकारो, हजारीबाग ,गिरिडीह जैसे स्थानीय खोरठा और कुरमाली भाषा को नजरअंदाज करना सरकार के लिए भारी पड़ेगा जेएमएम समर्थित हेमंत सोरेन सोचा भी नहीं होगा। इस रफ्तार की आग तीन से चार जिलों में देखने को मिला। इस आंदोलन की रफ्तार ने एक नए सामाजिक संगठनों को जन्म दिया। जिसका नाम आज झारखंडी भाषा खतियान भाषा संघर्ष के नाम से उभर कर आया जिसको लीड करने में सबसे ऊपर टाइगर जयराम महतो के रूप में बन के उभरा। सोशल एक्टिविस्ट मनीष कुमार महतो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने से पहले यह सोचा भी नहीं होगा कि उसके पुतला जलाए से जलाने से पूरी समाज की आंखें खुल जाएगी।

 

झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति का राजनीतिक भविष्य?

 

टाइगर जयराम महतो पिछले 2 सालों से जिस तरह से धनबाद, बोकारो ,हजारीबाग और रामगढ़ में अपने भाषणों से लोगों का दिल जीत रहे हैं। इससे लोग यह उम्मीद कर के बैठे हैं कि जरूर कोई ना कोई इसमें वह दम है ।जो राजनीति में कर दिखाएगा। परंतु जिसको राजनीति की समझ नहीं है ।वह इस चीज से अनजान है कि 10000 आदमी इकट्ठा करने से भीड़ पूरे वोट में तब्दील हो जाएगी यह असंभव प्रतीत होता है। शिक्षा में स्नातक में राजनीतिक शास्त्र का विषय है जो भी पढ़े हैं वह सभी लोग समझते हैं की राजनीति बहुत आसान सी चीज है। परंतु राजनीतिक इतनी कठिन और मुश्किल होती है। जो वर्तमान राजनीति में जो नेतागिरी कर रहे हैं उससे पूछा जाए तो आपके सारे सवालों का जवाब मिल। राजनीति में कुछ ऐसे स्लोगन है। जिससे आप को समझना पड़ेगा।” साम दाम दंड और भेद”राजनीति का ये चार फार्मूला में आपको माहिर होना होगा ।नहीं तो आप राजनीति नहीं कर सकते हैं। हां एक बात और आपको बता दूं की राजनीति में राजनीति के अलावा रणनीति और कूटनीति आप में कूट-कूट कर भरी होनी चाहिए तभी आप राजनीति के अच्छे खिलाड़ी माने जा सकते हैं।

 

 

झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति जब राजनीति में पैर रख रही है। राजनीति में पैर जमाना आसान काम नहीं होगी। धनबाद, बोकारो ,रामगढ़ और गिरिडीह यह तीन से चार जिलों में कुर्मी महतो का दबदबा माना जाता है। परंतु आप इन 3 जिलों से पूरे झारखंड की राजनीति पर आप कब्जा नहीं जमा सकते हैं। मानता हूं कि आप दो-तीन विधायक जीतकर विधानसभा भेज दें वह आपके लिए बहादुरी की बात है। परंतु एक नए मुख्यमंत्री के रूप में चेहरा देना कोई आसान काम नहीं। राजनीति करने के लिए बृहद रूप में आपको फंडिंग के साथ-साथ राजनीति के खेलने वाले माहिर खिलाड़ियों की आवश्यकता है। जो एक टाइगर जयराम महतो के बलबूते हर किसी एक चीज को शिकार करना नामुमकिन प्रतीत होता है।

 

सर्वप्रथम खतियान भाषा बचाओ आंदोलन से शुरू होकर 1932 खतियान और कुर्मी को आदिवासी बनाओ का समर्थन करने से टाइगर जयराम महतो के साथ जो आदिवासी कुनबा इसके समर्थन में था ।वह धीरे-धीरे इससे दूर होने लगा। झारखंडी खतियान भाषा बचाओ में अपना राजनीति का भविष्य देख रहे थे। उसमें कुछ आदिवासी का सपना छन से टूट कर चूर-चूर हो गया। क्योंकि राजनीति में हलचल मचा देने वाली आंदोलन कुडामियो/महतो ने आदिवासी बनने की मांग को लेकर दो बार राज्यों में रेल चक्का जाम कर चुके हैं। इससे टाइगर जयराम महतो के साथ चलने वाले आदिवासी कुनबा को स्पष्ट हो गया की एक आंदोलन के बहाने आदिवासी आरक्षण पर सेंध है मारने की कोशिश की जा रही है। जिसे यहां पर टाइगर जयराम महतो को साथ देने वाले आदिवासी वहां से कटकर अलग हो गए। इधर हाल के सिल्ली के नावाडीह में लोहार लोगों से छुआछूत के मामले में सोए हुए आदिवासियों की आंखें खोल दी। खैर मामले जो भी हो।

भाषा खतियान संघर्ष समिति 18 जून की धनबाद बलियापुर की जनसभा राजनीति में छाप छोड़ेगी यह कहना बहुत जल्दी बाजी होगा।झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति को एक सामाजिक संगठन कहा जाए तो एक मायने में सही। क्योंकि यह एक प्लेटफार्म के रूप में नए युवाओं को बोलने और समाज में नेतृत्व करने के लिए प्लेटफार्म के रूप में देखा जाएगा। परंतु राजनीतिक भविष्य की बात करें तो राजनीतिक पार्टी के कहीं भी आसपास नहीं दिखती है। राजनीतिक विश्लेषक , कुछ लोगों का मानना है कि अगर टाइगर जयराम महतो के नेतृत्व में 2024 की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ती है। दो तीन सीटें अगर यह सामाजिक संगठन जीत भी लेती है तो विधानसभा में आपको बड़े पार्टी कि समर्थन की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि आपको कोई भी विधेयक जन मुद्दों के लिए वोटिंग में समर्थन की जरूरत होती है। पत्रकारों और संपादकों का कहना है कि छात्र के जनहित मुद्दे को लेकर 20 साल पहले बनी पार्टी आजसू छात्रों के आंदोलन से उभर कर आई थी। परंतु वर्तमान में आजसू पार्टी सुदेश महतो ,महतो/कुड़ामी लोगों की पार्टी बनकर रह गई है। वर्तमान हालात में जिस तरह से राजनीति में उठापटक हो रही है ।इसे झारखंड में तीसरे मोर्चे की जरूरत बताई जाती है परंतु आजसू पार्टी एक सौदेबाजी पार्टी बनकर रह गई है। लोगों का कहना है झारखंडी खतियान भाषा संघर्ष कहीं आजसू पार्टी की बलि ना चढ़ जाए। यह भविष्य की बात है। यह नए पार्टी बनकर उभरती है। तो भी यह कुर्मी महतो की पार्टी बनकर रह जाएगी। क्योंकि झारखंडी खतियानी भाषा संघर्ष अपने मूल उद्देश्य भटकती हुई दिखती है। पार्टी गठन करने के लिए आपके हर एक जिलों में जोशीले कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष मंडल अध्यक्षों और तेज तरार नेतृत्व की जरूरत होती है। लेकिन एक टाइगर जयराम महतो के बलबूते यह सब देख पाना थोड़ा सा पेचीदा लगता है। दूसरी बात भाषा बचाओ और खतियान बचाव के नाम पर आदिवासी समुदाय के आरक्षण पर सेंध मारी का इसका सबसे बड़ा कमजोर कड़ी साबित होता है।

 

इतना तो स्पष्ट कहा जा सकता है टाइगर जयराम महतो जहां जहां पर सभा एवं रैली किए हैं वहां पर लोग अपने भाषा बचाओ खतियान बचाओ नौकरी बचाओ पर जागरूक जरूर हो गए हैं। कोई भी पार्टी अपनी पॉलिसी से चलती है नाम ही इसका राजनीति है। अगर आप अपने राज्य की नीति नहीं बना सकते हैं तो आप राजनीति नहीं कर सकते हैं। पार्टी चलाने के लिए आपके पास जनताओ के मुद्दों के साथ-साथ पार्टी की एक पॉलिसी होनी बहुत जरूरी है। इस पार्टी के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।

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