सांसद “कोकराझार असम”श्री नवो कुमार कुमार शरानिया से राज़ी पड़ाह सरना प्रार्थना सभा भारत के 11 सदस्य प्रतिनिधि मंडल धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अध्यक्षता में सरना धर्म” कोड को भारतीय जनगणना अनुसूची में शामिल करने मांग

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राज़ी पड़ाह सरना प्रार्थना सभा भारत के 11 सदस्य प्रतिनिधि मंडल धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अध्यक्षता में
“श्री नवो कुमार कुमार शरानिया” माननीय सांसद “कोकराझार असम”
से उनके नई दिल्ली स्थित आवास पर प्राकृतिकवादी “सरना धर्म” कोड को भारतीय जनगणना अनुसूची में मुख्य धर्म कलम खंड में सातवें धर्म के रूप में सूचीबद्ध करने में आपके अपेक्षित सहयोग कैसे हो इस संबंधित वार्ता हुई।
वार्ता सोहदपूर्ण रही,


प्रतिनिधि मंडल द्वारा श्री शारानिया जी से निवेदन किया गया कि आगामी शीतकालीन सत्र नवंबर 2023 में आप इस मुद्दे को लोकसभा में उठाएं व सरकार के समक्ष हम भारत देश के 21 राज्यों में निवास करने वाले आदिवासियों के धार्मिक पहचान दिलाने में हमें मदद करें। उन्होंने आश्वासन हमें दिया, में ही नहीं हमारे आदिवासी समाज के अन्य समान विचारधारा वाले और भी सांसदों से में स्वयं संपर्क स्थापित कर, हमारी इस संवैधानिक मांग जो हमें संविधान के अनुच्छेद 25 (01) “धर्म को अंतःकरण से मानने की स्वतंत्रता” का अधिकार प्राप्त है।
व महानिबंधक जनगणना भारत के मुख्य धर्म में खंड(बॉक्स) में सूचीबद्ध होने के नियम “
कि जिस धर्म की संख्या-बल ज्यादा संख्या होगी वह धर्म खंड(बॉक्स) में मुख्य धर्म के रूप में शामिल होगा”
के अनुसार संख्या-बल में “सरना धर्म” देश के आदिवासी बहुल २१ राज्य में सरना धर्मवलंबी -4957466 संख्या बल में जैन धर्म-4451753 के मुकाबले 505715 ज्यादा है, महानिबंधक जनगणना कार्यालय के पत्र संख्या -16/02/2010,SS दिनांक 12/20 नवंबर 2015 के अनुसार जो धर्म ज्यादा है, उन्हें जनगणना अनूसूची प्रपत्र में मुख्य कलम में खंड(बॉक्स)में दर्शाया जाता है।
सरना धर्मवलंबी 2011 की जनगणना के अनुसार जैन धर्म से ऊपर छठे नंबर है,अतः इसे नियम अनुसार जनगणना अनूसूची प्रपत्र में मुख्य धर्मो के साथ खंड (बॉक्स) -07 बनाकर सातवें नंबर पर सूचीबद्ध करने हेतु तर्कसंगत प्रश्न में आगामी शीतकालीन सत्र में बड़े जोर-सोर भारतीय संसद में रखूंगा, ताकि भारत सरकार पर दवाब डाला सके तथा इस महत्वपूर्ण विषय को त्वरित कार्रवाई कर संज्ञान में ले।
और हम भारत देश के आदिवासियों को संविधान के अनुच्छेद 25 (01) के तहत धर्म की स्वतंत्र के अधिकार से हम वंचित न हो।

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