धनबाद में नियोजन व मुआवजा को लेकर चेन्नई राधा आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ लाइजनर तथा रैयतों का “रास्ता रोको” कार्यक्रम

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कतरास: बीसीसीएल एरिया 5 के अंतर्गत तेतुलमारी कोलियरी में संचालित मेसर्स चेन्नई राधा इंजीनियरिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड आउटसोर्सिंग कंपनी के लाइजनर सह सांसद प्रतिनिधि नरेश महतो एवं रैयतों ने शुक्रवार को कंपनी और बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ रास्ता रोको अभियान सह धरना प्रदर्शन कार्यक्रम चलाया. आंदोलन कर रहे लोगों के साथ मौके पर उपस्थित सांसद प्रतिनिधि सह कंपनी के लाइजनर नरेश महतो ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि कंपनी ने रैयतों से 2 महीना का समय लेकर इस शर्त पर यहाँ रास्ता बनवाया था की वे रैयतों को जमीन के बदले उचित मुआवजा व नियोजन देंगे . लेकिन 2 महीना का एग्रीमेंट खत्म हो जाने के बावजूद भी कंपनी ने अपना वादा पूरा नहीं किया. अभी तक किसी भी रैयत को नियोजन व मुआवजा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि कंपनी बड़े राजघराने के समर्थन से लाठी डंडे और बंदूक के नोक पर आउटसोर्सिंग चलाना चाहती है. लेकिन हम लोग यह कतई नहीं होने देंगे. जब तक रैयतों को मुआवजा व नियोजन नहीं मिलेगा तब तक अनिश्चितकालीन अवधि के लिए कंपनी के खिलाफ रास्ता रोको कार्यक्रम चलता रहेगा. रैयत नवल किशोर वर्मा, रामनाथ प्रसाद, बिरेन्द्र सिंह तथा रामानुज ने बताया कि कंपनी जहां खनन कार्य कर रही है उसके रास्ते में हम लोगों का 28 एकड़ का प्लॉट है. बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा कहा गया था कि 2 महीने के भीतर मुआवजा व नियोजन दिया जाएगा. लेकिन दो महीना का समय बीत जाने के बाद बीसीसीएल प्रबंधन नियोजन व मुआवजा के मुद्दे पर बातचीत करने से पीछे हट रही है. बार-बार टाल मटोल कर रही है. इसलिए हम लोगों के द्वारा अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है. मौके पर कंपनी के लाइजनर नरेश महतो, गिरिधारी महतो, संतोष महतो, पप्पू महतो, बिरेंद्र सिंह, नीरज वर्मा ,नवल किशोर वर्मा, गणेश बाउरी, बिरजू बाउरी, रामनाथ प्रसाद, रामानुज प्रसाद, सूरज वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा आदि लोग उपस्थित थे.

नगरी कला व चन्दौर मौजा के रैयतों ने “रास्ता रोको” कार्यक्रम को नही दिया समर्थन

नगरी कला एवं चन्दौर मौजा के स्थानीय रैयतों ने चेन्नई राधा आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ चलाये जा रहे “रास्ता रोको” कार्यक्रम को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. नगरी कला व चन्दौर मौजा के स्थानीय रैयतों ने बताया कि उनलोगों को आउटसोर्सिंग कम्पनी के खिलाफ “रास्ता रोको” कार्यक्रम में सहयोग और समर्थन देने के लिए कहा गया था. लेकिन उनलोगों(रैयतों) ने इस कार्यक्रम को सहयोग देने से साफ मना कर दिया. रैयतों ने कहा कि जब वे लोग अपनी जमीन के लिए बीसीसीएल प्रबंधन एवं कंपनी के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. उस समय इन्हीं लोगों के द्वारा कहा गया था कि तुमलोगों ने अपना जमीन बीसीसीएल को बेच दिया है. वहाँ तुमलोगों का कोई जमीन नही है. तो जब वहां हमलोगों का जमीन ही नही है तो रास्ता “रोको कार्यक्रम” का प्रतिनिधित्व करने वाले किस आधार पर हमलोग से समर्थन मांग रहे है.

चेन्नई राधा आउटसोर्सिंग कंपनी ने खनन कार्य के लिए दूसरे कंपनी को दिया कॉन्ट्रैक्ट

कतरास: आउटसोर्सिंग कम्पनी को ठीक से चलाने के लिए बोकारो के एक कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया है जिसका संचालक का नाम अश्विनी कुमार बताया जा रहा है. कंपनी के मैनेजर मुथू स्वामी ने बताया कि कंपनी को कार्य करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था इसलिए कंपनी ने बोकारो के एक कंपनी को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर आउटसोर्सिंग दे दिया है. अब जो कंपनी काम करेगी वह अपने सुविधा अनुसार लोगों को रखेगी. लाइजनर के सवाल पर उन्होंने कहा कि लाइजनर कौन बनेगा यह नई कंपनी तय करेगी. बता दें कि कंपनी को यहां काम करते हुए 5 महीना से अधिक समय बीत गया है. स्थानीय रैयतों के नियोजन व मुआवजे को लेकर कंपनी शुरू से ही विवादों में घिरी रही. बता दें कि तत्कालीन लाइजनर नरेश महतो के कार्यकाल में ही नगरीकला के एक महिला का आउटसोर्सिंग परियोजना में कोयला चुनने के दौरान चाल गिरने से मौत हो गया था. इस मामले में चेन्नई राधा आउटसोर्सिंग कंपनी की काफी किरकिरी हुई थी.

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